रामेश्वरम की पहचान सिर्फ उसके मंदिरों और समुद्र से ही नहीं, बल्कि उस लोहे के ऊंचे पुल से भी रही है जिसने पिछले 111 सालों से समंदर की लहरों और तूफानों का डटकर मुकाबला किया। लेकिन जैसा कि कहते हैं, समय के साथ बदलाव जरूरी है। हाल ही में रामेश्वरम के इस ऐतिहासिक पंबन रेलवे ब्रिज (Pamban Railway Bridge) को हटाने यानी डिस्मेंटलिंग (Dismantling) का काम आधिकारिक रूप से शुरू हो चुका है।
क्या आप सोच सकते हैं कि एक सदी से ज्यादा पुराना पुल, जिसने लाखों श्रद्धालुओं को उनकी आस्था के द्वार तक पहुँचाया, आज चुपचाप विदा ले रहा है? आइए जानते हैं इस ऐतिहासिक पुल की आखिरी यात्रा और इससे जुड़ी कुछ बेहद भावुक और जरूरी बातें।
क्यों हटाया जा रहा है यह ऐतिहासिक पुल?
शायद आप सोच रहे होंगे कि जो पुल 1964 के भयंकर चक्रवात में भी टिका रहा, उसे अब क्यों हटाया जा रहा है? असल में, इसके पीछे का मुख्य कारण इंजीनियरिंग और सुरक्षा (Safety) है।
- जंग का खतरा (Corrosion): पंबन ब्रिज दुनिया के दूसरे सबसे अधिक संक्षारक (Corrosive) वातावरण में स्थित है। खारे पानी और समुद्री हवाओं ने इसके लोहे को काफी कमजोर कर दिया है।
- सुरक्षा मानक: दिसंबर 2022 में एक ट्रेन गुजरते समय इसमें अत्यधिक कंपन (Vibrations) महसूस किए गए थे, जिसके बाद रेल यातायात को तुरंत रोक दिया गया।
- पुराना सिस्टम: इसका मशहूर ‘शर्जर रोलिंग लिफ्ट स्पैन’ (Scherzer Rolling Lift Span), जो जहाजों के लिए हाथों से खोला जाता था, अब पूरी तरह जर्जर हो चुका था।
नए और आधुनिक विकल्प का उदय
पुरानी यादों को संजोते हुए रेलवे ने इसके समानांतर ही एक नया वर्टिकल लिफ्ट सी ब्रिज (New Pamban Bridge) तैयार किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अप्रैल 2025 में इसका उद्घाटन किया था। यह नया पुल तकनीक के मामले में बहुत आगे है—जहां पुराना स्पैन हाथ से खुलता था, वहीं नया पुल इलेक्ट्रिक मशीनों से ऊपर की ओर सीधा उठता है।
कैसे हो रहा है डिस्मेंटलिंग का काम?
पुल को हटाना कोई साधारण काम नहीं है। यह किसी सर्जरी से कम नहीं है क्योंकि प्रशासन चाहता है कि इस ऐतिहासिक ढांचे के कुछ हिस्सों को सहेज कर रखा जाए।
- नंबरिंग सिस्टम: पूरे पुल पर 1 से लेकर आखिर तक नंबर लिखे गए हैं, ताकि इसे स्टेप-बाय-स्टेप हटाया जा सके।
- शर्जर स्पैन पर फोकस: सबसे पहले उस मशहूर बीच वाले हिस्से को काटा जा रहा है जो जहाजों के लिए खुलता था।
- संग्रहालय (Museum) की मांग: स्थानीय लोगों और पर्यटकों की यह प्रबल इच्छा है कि इस 111 साल पुराने अजूबे को पूरी तरह नष्ट न करके, इसके मुख्य हिस्सों को एक रेलवे म्यूजियम में रखा जाए ताकि आने वाली पीढ़ियां इसे देख सकें।
क्या आपको भी लगता है कि ऐसे ऐतिहासिक ढांचों को म्यूजियम में संजोकर रखना चाहिए?
पंबन ब्रिज से जुड़ी कुछ अनकही बातें
यह पुल सिर्फ कंक्रीट और लोहे का ढांचा नहीं था। इसके साथ कई भावनात्मक कहानियां जुड़ी हैं:
- 1914 की शुरुआत: इसका निर्माण तब हुआ था जब तकनीक बहुत सीमित थी। इसे बनाने में 2,000 टन से ज्यादा स्टील का इस्तेमाल हुआ था।
- कलाम साहब का जुड़ाव: पूर्व राष्ट्रपति डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम का इस पुल से गहरा नाता था। 2006 में जब इसे बंद करने की बात उठी थी, तब उन्हीं की देखरेख में इसे फिर से तैयार कर शुरू किया गया था।
- आखरी सफर: 22 दिसंबर 2022 को ‘सेतु एक्सप्रेस’ इस पर चलने वाली आखिरी ट्रेन बनी, जिसने अनगिनत यात्रियों की आंखों में नमी छोड़ दी।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
1. पुराने पंबन ब्रिज को कब खोला गया था? पुराने पंबन रेलवे ब्रिज का उद्घाटन 24 फरवरी 1914 को हुआ था। यह भारत का पहला समुद्री पुल था।
2. पुराने पुल को हटाने में कितना समय लगेगा? रेलवे अधिकारियों के अनुसार, पुल को सुरक्षित रूप से हटाने (Dismantling) के काम में लगभग 4 महीने का समय लग सकता है।
3. क्या अब रामेश्वरम के लिए ट्रेनें चल रही हैं? हाँ, अब सभी ट्रेनें नए बने ‘वर्टिकल लिफ्ट ब्रिज’ के जरिए संचालित की जा रही हैं, जो पुराने पुल के बिल्कुल पास ही बना है।
4. क्या पुराने पुल के अवशेषों को देखा जा सकेगा? ऐसी योजना है कि पुल के कुछ महत्वपूर्ण हिस्सों को रेलवे म्यूजियम में पर्यटकों के लिए प्रदर्शित किया जाएगा।
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