Aerial view of the Learjet 45 crash site in Baramati where Ajit Pawar died, highlighting the 28-day safety gear delay.The tragic crash of Ajit Pawar’s Learjet 45 in Baramati has raised questions over a 28-day delay in installing critical satellite safety equipment.

महाराष्ट्र की राजनीति के कद्दावर नेता अजित पवार (Ajit Pawar) का बारामती में हुआ विमान हादसा आज पूरे देश में चर्चा का विषय बना हुआ है। 28 जनवरी 2026 की उस सुबह ने न केवल एक बड़े नेता को हमसे छीना, बल्कि विमानन सुरक्षा (Aviation Safety) पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

सबसे हैरान कर देने वाली बात जो सामने आ रही है, वो ये है कि जिस विमान में वे सवार थे, वह एक ऐसी तकनीक से लैस होने से महज 28 दिन से चूक गया, जो शायद उनकी जान बचा सकती थी। चलिए समझते हैं कि आखिर वो कौन सा ‘सुरक्षा कवच’ था और कैसे वक्त की एक छोटी सी चूक इतनी बड़ी त्रासदी बन गई।


क्या था वो सैटेलाइट सिस्टम जो विमान में नहीं था?

जांच में यह बात सामने आई है कि जिस ‘लियरजेट 45’ (Learjet 45) विमान का हादसा हुआ, उसमें आधुनिक सैटेलाइट-आधारित नेविगेशन सिस्टम (GAGAN) की कमी थी। गगन (GPS Aided GEO Augmented Navigation) एक ऐसी तकनीक है जो खराब दृश्यता (Poor Visibility) और धुंध के दौरान पायलट को सटीक लैंडिंग में मदद करती है।

अक्सर जब रनवे साफ नहीं दिखता, तो यह सिस्टम सैटेलाइट के जरिए विमान को बिल्कुल सही दिशा और ऊंचाई बताता है। बारामती एयरपोर्ट पर हादसे के वक्त दृश्यता बहुत कम थी। अगर यह सिस्टम विमान में होता, तो शायद पायलट को रनवे का सही अंदाजा मिल जाता।


सिर्फ 28 दिन का वो ‘डेडलाइन’ खेल

अब आप सोच रहे होंगे कि इसमें 28 दिन का क्या चक्कर है? दरअसल, भारत के विमानन नियामक (DGCA) ने एक नियम लागू किया था जिसके तहत एक निश्चित तारीख के बाद पंजीकृत (Register) होने वाले सभी नए विमानों में इस सैटेलाइट सिस्टम का होना अनिवार्य था।

अजित पवार का यह विमान उस अनिवार्य डेडलाइन से ठीक 28 दिन पहले रजिस्टर हुआ था। तकनीकी रूप से यह विमान नियमों के दायरे में ‘कानूनी’ तो था, लेकिन सुरक्षा के उन आधुनिक मानकों से पीछे रह गया जो इसके ठीक एक महीने बाद अनिवार्य होने वाले थे। क्या आपको नहीं लगता कि सुरक्षा के मामले में ऐसी कानूनी बारीकियां कभी-कभी कितनी महंगी पड़ सकती हैं?


बारामती एयरपोर्ट: क्या सुविधाओं की कमी भी थी वजह?

हादसे की कड़ियों को जोड़ें तो सिर्फ विमान की तकनीक ही नहीं, बल्कि बारामती एयरपोर्ट का बुनियादी ढांचा भी सवालों के घेरे में है। रिपोर्ट्स के मुताबिक:

  • मौसम विभाग की कमी: बारामती स्ट्रिप पर कोई समर्पित मौसम केंद्र (IMD Office) नहीं है।
  • टेबल-टॉप रनवे: यह एयरपोर्ट एक ऊंची सतह पर बना है, जिसे ‘टेबल-टॉप’ कहा जाता है। ऐसे रनवे पर लैंडिंग वैसे ही बहुत रिस्की होती है।
  • इंस्ट्रूमेंट लैंडing सिस्टम (ILS): यहां बड़े हवाई अड्डों की तरह आधुनिक लैंडिंग एड्स की कमी थी।

पायलट ने दो बार लैंडिंग की कोशिश की, लेकिन कम विजिबिलिटी और सटीक नेविगेशन के अभाव में विमान रनवे के किनारे से टकरा गया।


चार्टर विमानों की सुरक्षा पर उठते सवाल

अक्सर वीआईपी (VIP) मूवमेंट के लिए प्राइवेट चार्टर विमानों का इस्तेमाल किया जाता है। लेकिन क्या इन विमानों के मेंटेनेंस और सेफ्टी फीचर्स की उतनी ही कड़ाई से जांच होती है जितनी कमर्शियल एयरलाइंस की?

विशेषज्ञों का कहना है कि कई बार चार्टर ऑपरेटर्स पुराने विमानों का इस्तेमाल करते हैं जो कानूनी रूप से तो ‘फिट’ होते हैं, लेकिन उनमें आज के समय की सबसे बेहतरीन तकनीक नहीं होती। अजित पवार के मामले में भी यही हुआ—विमान नियमों के हिसाब से सही था, पर सुरक्षा के लिहाज से ‘अपडेटेड’ नहीं था।


अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

1. गगन (GAGAN) सिस्टम क्या है? यह भारत का अपना सैटेलाइट-आधारित सिस्टम है जो विमानों को लैंडिंग के दौरान सटीक रास्ता और लोकेशन बताने में मदद करता है, खासकर जब मौसम खराब हो।

2. क्या अजित पवार का विमान अवैध था? नहीं, विमान पूरी तरह वैध और रजिस्टर्ड था। बस वह उस नई डेडलाइन के आने से 28 दिन पहले रजिस्टर हुआ था जिसमें सैटेलाइट गियर अनिवार्य किया गया था।

3. क्या खराब मौसम ही हादसे की मुख्य वजह थी? प्रारंभिक रिपोर्ट के अनुसार, कम दृश्यता (Low Visibility) और दूसरे लैंडिंग प्रयास के दौरान नियंत्रण खोना मुख्य कारण लग रहे हैं, लेकिन अंतिम जांच रिपोर्ट (AAIB) का अभी इंतजार है।

Video Credit: NDTV India


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