भारत के त्रिपुरा (Tripura) राज्य के घने जंगलों के बीच एक ऐसी जगह है, जिसे देखकर बड़े से बड़ा वैज्ञानिक और इतिहासकार भी दंग रह जाता है। हम बात कर रहे हैं उनाकोटी (Unakoti) की। यहाँ पत्थरों पर उकेरी गई करोड़ों मूर्तियाँ हैं, लेकिन दिलचस्प बात यह है कि इनकी गिनती एक करोड़ से ठीक एक कम है।
क्या आपने कभी सोचा है कि घने जंगलों में इतनी विशाल मूर्तियाँ किसने और क्यों बनाईं? लोककथाओं की मानें तो यह इंसान का नहीं, बल्कि साक्षात भगवान शिव (Lord Shiva) के क्रोध का नतीजा है। आइए, इस लेख में उनाकोटी की उस रहस्यमयी कहानी (Mysterious Story) को गहराई से समझते हैं।
उनाकोटी का अर्थ: ‘एक करोड़ से एक कम’
सबसे पहले यह समझना ज़रूरी है कि ‘उनाकोटी’ शब्द का मतलब क्या है। बंगाली भाषा में ‘उना’ का अर्थ होता है एक कम और ‘कोटी’ का मतलब होता है करोड़। यानी ‘एक करोड़ में एक कम’ (One less than a crore)।
पौराणिक मान्यताओं (Mythological beliefs) के अनुसार, यहाँ कुल 99,99,999 मूर्तियाँ मौजूद हैं। यह संख्या अपने आप में एक पहेली है। आखिर बनाने वाले ने एक करोड़ का आंकड़ा पूरा क्यों नहीं किया? इसके पीछे छिपी है महादेव के क्रोध और एक श्राप की कहानी।
पौराणिक कथा: जब महादेव को आया क्रोध
प्रचलित कथा के अनुसार, एक बार भगवान शिव के साथ एक करोड़ देवी-देवता (Gods and Goddesses) काशी (Kashi) की ओर जा रहे थे। सफर लंबा था, इसलिए सभी ने त्रिपुरा के इन जंगलों में रात को विश्राम करने का फैसला किया।
महादेव ने सभी को सख्त निर्देश दिया था कि अगले दिन सूर्योदय (Sunrise) से पहले सभी को जागना होगा और अपनी यात्रा फिर से शुरू करनी होगी। लेकिन होनी को कुछ और ही मंज़ूर था।
शिव का श्राप और पत्थर बनी मूर्तियाँ
जब सुबह सूरज की पहली किरण निकली, तो केवल भगवान शिव ही जागे थे। बाकी के सभी 99,99,999 देवी-देवता गहरी नींद में सो रहे थे। महादेव को यह अनुशासनहीनता पसंद नहीं आई।
क्रोध में आकर शिव ने उन सभी को श्राप दे दिया और वे सभी हमेशा के लिए पत्थर (Stone) के बन गए। महादेव अकेले ही काशी की ओर निकल गए और तब से ये मूर्तियाँ इसी जंगल में मौजूद हैं। यही कारण है कि यहाँ एक करोड़ से एक मूर्ति कम है।
कल्लू कुम्हार की कहानी: एक और दिलचस्प पहलू

उनाकोटी के साथ एक और कहानी जुड़ी है, जो कल्लू कुम्हार (Kallu Kumhar) के इर्द-गिर्द घूमती है। कहा जाता है कि कल्लू कुम्हार भगवान शिव और माता पार्वती का बहुत बड़ा भक्त था और उनके साथ कैलाश पर्वत जाना चाहता था।
माता पार्वती के कहने पर शिव ने एक शर्त रखी: “अगर तुम एक रात में एक करोड़ मूर्तियाँ बना दोगे, तो मैं तुम्हें अपने साथ ले जाऊंगा।”
कल्लू ने पूरी रात जी-तोड़ मेहनत की, लेकिन जब सुबह गिनती की गई, तो एक मूर्ति कम निकली। इस वजह से कल्लू का सपना अधूरा रह गया। कुछ लोग कहते हैं कि यह कल्लू का अहंकार तोड़ने के लिए किया गया था।
वास्तुकला और नक्काशी (Architecture of Unakoti)

उनाकोटी की मूर्तियाँ मुख्य रूप से दो प्रकार की हैं:
- चट्टानों को काटकर बनाई गई मूर्तियाँ (Rock-cut carvings)
- पत्थरों पर उकेरी गई आकृतियाँ (Stone images)
इनमें सबसे विशाल मूर्ति ‘उनाकोटीश्वर काल भैरव’ की है, जो लगभग 30 फीट ऊंची है। इसके सिर पर बनी अद्भुत नक्काशी और दोनों तरफ दो महिला मूर्तियाँ (जिनमें से एक माँ दुर्गा हैं) कला का बेहतरीन नमूना पेश करती हैं।
यहाँ गणेश जी की भी विशाल मूर्तियाँ हैं, जिनमें उनकी सूंढ़ और दांतों को बहुत ही बारीकी से दिखाया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि ये मूर्तियाँ 8वीं या 9वीं शताब्दी की हो सकती हैं।
उनाकोटी कैसे पहुँचें? (Travel Guide)
अगर आप इस रहस्य को अपनी आँखों से देखना चाहते हैं, तो आपको त्रिपुरा की राजधानी अगरतला (Agartala) पहुँचना होगा।
- हवाई मार्ग: अगरतला का महाराजा बीर विक्रम एयरपोर्ट सबसे नज़दीकी हवाई अड्डा है।
- रेल मार्ग: पास का रेलवे स्टेशन कुमारघाट (Kumarghat) है।
- सड़क मार्ग: अगरतला से उनाकोटी लगभग 178 किमी दूर है, जहाँ से आप टैक्सी या बस ले सकते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
1. उनाकोटी में कुल कितनी मूर्तियाँ हैं? पौराणिक कथाओं के अनुसार यहाँ 99,99,999 मूर्तियाँ हैं, जो एक करोड़ से एक कम हैं।
2. उनाकोटी कहाँ स्थित है? यह भारत के उत्तर-पूर्वी राज्य त्रिपुरा के उनाकोटी जिले में स्थित है।
3. उनाकोटी की मूर्तियों को किसने बनाया? इतिहासकारों के अनुसार ये 8वीं-9वीं शताब्दी की हैं, लेकिन स्थानीय मान्यताओं के अनुसार इन्हें भगवान शिव के श्राप या कल्लू कुम्हार ने बनाया था।
4. क्या उनाकोटी को यूनेस्को (UNESCO) की मान्यता प्राप्त है? जी हाँ, उनाकोटी को यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थलों की अस्थायी सूची (Tentative List) में शामिल किया गया है।
निष्कर्ष (Conclusion)
उनाकोटी सिर्फ पत्थरों का ढेर नहीं है, बल्कि यह हमारे इतिहास, आस्था और बेजोड़ कला का मेल है। चाहे वह शिव का क्रोध हो या कल्लू कुम्हार की मेहनत, यहाँ की हर चट्टान एक कहानी सुनाती है। अगर आप एडवेंचर और आध्यात्मिकता (Spirituality) के शौकीन हैं, तो यह जगह आपके लिए किसी जन्नत से कम नहीं है।
आपकी क्या राय है? क्या आपको लगता है कि वाकई ये मूर्तियाँ किसी दैवीय शक्ति का परिणाम हैं या यह प्राचीन इंसानों की बेहतरीन इंजीनियरिंग? हमें कमेंट्स में ज़रूर बताएं!
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